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काबुलीवाला

सहसा मेरी पाँच वर्ष की लाड़ली बेटी मिनी ‘अगड़म बगड़म’ का खेल छोड़कर खिड़की की तरफ़ भागी और ज़ोर-ज़ोर से पुकारने लगी, “काबुलीवाले, ओ काबुलीवाले!”

मैं इस समय उपन्यास लिख रहा था। नायक, नायिका को लेकर अँधेरी रात में जेल की ऊँची खिड़की से नीचे बहती नदी के जल में कूद रहा था। घटना वहीं रुक गई।

सोचने लगा—‘मेरी बेटी कितनी चंचल और बातूनी है। अभी कुछ पल पहले वह मेरे पैरों के पास बैठी खेल रही थी कि अचानक उसे यह क्या सूझी।’ मिनी के इस काम से मुझे अचरज तो नहीं हुआ पर परेशानी ज़रूर महसूस हुई। मैंने सोचा, “बस अब पीठ पर झोली लिए काबुलीवाला आ खड़ा होगा, मेरा सत्रहवाँ अध्याय अब पूरा नहीं हो सकता।”

ज्यों ही काबुलीवाले ने हँस कर मुँह फेरा और मेरे घर की ओर आने लगा त्यों ही वह घर के अंदर भाग आई। उसके मन में एक झूठा विश्वास था कि काबुलीवाला अपनी झोली में उसी की तरह के दो-चार चुराए गए बच्चे छिपाए रहता है। इधर काबुलीवाला आकर मुस्कुराता हुआ मुझे सलाम करके खड़ा हो गया। आदमी को घर पर बुलाकर कुछ न ख़रीदना अच्छा नहीं लगता, इसलिए उससे कुछ ख़रीदा। दो-चार बातें हुई। पता चला, उसका नाम रहमत था।

सहसा मेरी पाँच वर्ष की लाड़ली बेटी मिनी ‘अगड़म बगड़म’ का खेल छोड़कर खिड़की की तरफ़ भागी और ज़ोर-ज़ोर से पुकारने लगी, “काबुलीवाले, ओ काबुलीवाले!”

मैं इस समय उपन्यास लिख रहा था। नायक, नायिका को लेकर अँधेरी रात में जेल की ऊँची खिड़की से नीचे बहती नदी के जल में कूद रहा था। घटना वहीं रुक गई।

सोचने लगा—‘मेरी बेटी कितनी चंचल और बातूनी है। अभी कुछ पल पहले वह मेरे पैरों के पास बैठी खेल रही थी कि अचानक उसे यह क्या सूझी।’ मिनी के इस काम से मुझे अचरज तो नहीं हुआ पर परेशानी ज़रूर महसूस हुई। मैंने सोचा, “बस अब पीठ पर झोली लिए काबुलीवाला आ खड़ा होगा, मेरा सत्रहवाँ अध्याय अब पूरा नहीं हो सकता।”

ज्यों ही काबुलीवाले ने हँस कर मुँह फेरा और मेरे घर की ओर आने लगा त्यों ही वह घर के अंदर भाग आई। उसके मन में एक झूठा विश्वास था कि काबुलीवाला अपनी झोली में उसी की तरह के दो-चार चुराए गए बच्चे छिपाए रहता है। इधर काबुलीवाला आकर मुस्कुराता हुआ मुझे सलाम करके खड़ा हो गया। आदमी को घर पर बुलाकर कुछ न ख़रीदना अच्छा नहीं लगता, इसलिए उससे कुछ ख़रीदा। दो-चार बातें हुई। पता चला, उसका नाम रहमत था।

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सहसा मेरी पाँच वर्ष की लाड़ली बेटी मिनी ‘अगड़म बगड़म’ का खेल छोड़कर खिड़की की तरफ़ भागी और ज़ोर-ज़ोर से पुकारने लगी, “काबुलीवाले, ओ काबुलीवाले!”

मैं इस समय उपन्यास लिख रहा था। नायक, नायिका क...
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सोचने लगा—‘मेरी बेटी कितनी चंचल और बातूनी है। अभी कुछ पल पहले वह मेरे पैरों के पास बैठी खेल रही थी कि अचानक उसे यह क्या सूझी।’ मिनी के इस काम से मुझे अचरज तो नहीं हुआ पर परेशानी ज़रूर महसूस हुई। ...
सहसा मेरी पाँच वर्ष की लाड़ली बेटी मिनी ‘अगड़म बगड़म’ का खेल छोड़कर खिड़की की तरफ़ भागी और ज़ोर-ज़ोर से पुकारने लगी, “काबुलीवाले, ओ काबुलीवाले!”

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