चौदहवाँ परिच्छेद
इसी तरह दो वर्ष बीत गये। महेन्द्र का विवाह करके पार्वती बहुत कुछ निश्चिन्त हो गई है। पुत्रवधू जलदबाला बुद्धिमती और कार्यपटु है। उसके बदले संसार के बहुत-से काम वही करती हैं । पार्वती ने अब दूसरी ओर मन लगाया है। उसका ना पाँच वर्ष हो गये लेकिन कोई सन...
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