दसवाँ परिच्छेद
पार्वती ने आ कर देखा कि उसके स्वामी का मकान बहुत बड़ा है, लेकिन वह नये साहबी फैशन का नहीं, पुराने ढंग का है। मरदाना महल, जनाना महल, पूजा का दालान, नाटय- मन्दिर, अतिथि शाला, कचहरी, तोशखाना और बहुत से दास तथा दासियाँ हैं। पार्वती अवाक रह गई। उसने सु...
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