पाँचवाँ परिच्छेद
एक दिन पार्वती की बुढ़िया दादी ने कहा--पार्वती ने अब तेरहवें वर्ष में पैर रखा है, इसके ब्याह की कुछ फिकर करो। वैसे भी इस अवस्था में शारीरिक सौन्दर्य न जाने कहाँ से दौड़ा आ पहुँचता है और किशोरी के सर्वाग में छा जाता है। आत्मीय-स्वजन सहसा एक दिन चौं...
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