वो नन्हे फ़रिश्ते
**वो नन्हे फ़रिश्ते**वे लबों से कुछ कहते नहीं, पर सब जान लेते हैं,
मेरे हर एक एहसास को, वे पल में पहचान लेते हैं।
वे नन्हे से फ़रिश्ते, जो घूमते हैं बनकर मेरा साया,
खुदा ने उनकी मासूमियत में, जैसे सारा सुकून है समाया।ये बेफ़िक्र खिलखिलाहट, य...
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