चिनार
साल 1980 की ठंडी सुबह थी। कश्मीर की वादियों में पतझड़ उतर आया था।श्रीनगर से थोड़ा दूर एक छोटा सा गाँव था — लकड़ी के पुराने घर, टीन की छतें, आँगनों में सूखते सेब और हर रास्ते के किनारे खड़े लंबे-लंबे चिनार के पेड़।हवा चलती तो लाल पत्ते पूरे गाँव मे...
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