बोलने वाली रजाई
(ठण्ड में ठिठुरते दो बच्चों की एक दुःख भरी कहानी)
“अंदर चले आएं, श्रीमान, अंदर चले आएं। मैं आपका ह्रदय से स्वागत करता हूं।” जैसे ही व्यापारी ने सराय के दरवाजे पर पांव रखा, सराय का मालिक खुशी में भर चिल्लाया।
यह सराय उसी दिन खोली गई थी और उस समय तक कोई भी व्यक्ति उस सराय में नहीं आया था। वास्तव में वह सराय प्रथम श्रेणी की सराय न थी। सराय का मालिक बहुत ही निर्धन मनुष्य था। उसका अधिकांश सामान, जैसे चटाइयां, मेजें, बर्तन इत्यादि एक कबाड़ी की दूकान से खरीदा गया था। व्यापारी को सराय पसंद आयी। अपना मन-पसंद भोजन करने के बाद वह बिस्तर पर जा लेटा, अभी वह कुछ ही देर सो पाया होगा कि उसे कमरे में दो आवाजें सुनाई दीं जिससे उसकी नींद उचट गई। ये आवाजें दो छोटे-छोटे लड़कों की मालूम होती थीं।
“प्यारे बड़े भाई, क्या आपको ठण्ड लग रही है? पहली आवाज थीं।
(ठण्ड में ठिठुरते दो बच्चों की एक दुःख भरी कहानी)
“अंदर चले आएं, श्रीमान, अंदर चले आएं। मैं आपका ह्रदय से स्वागत करता हूं।” जैसे ही व्यापारी ने सराय के दरवाजे पर पांव रखा, सराय का मालिक खुशी में भर चिल्लाया।
यह सराय उसी दिन खोली गई थी और उस समय तक कोई भी व्यक्ति उस सराय में नहीं आया था। वास्तव में वह सराय प्रथम श्रेणी की सराय न थी। सराय का मालिक बहुत ही निर्धन मनुष्य था। उसका अधिकांश सामान, जैसे चटाइयां, मेजें, बर्तन इत्यादि एक कबाड़ी की दूकान से खरीदा गया था। व्यापारी को सराय पसंद आयी। अपना मन-पसंद भोजन करने के बाद वह बिस्तर पर जा लेटा, अभी वह कुछ ही देर सो पाया होगा कि उसे कमरे में दो आवाजें सुनाई दीं जिससे उसकी नींद उचट गई। ये आवाजें दो छोटे-छोटे लड़कों की मालूम होती थीं।
“प्यारे बड़े भाई, क्या आपको ठण्ड लग रही है? पहली आवाज थीं।
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