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जिंदगी से लेकर मौत तक

देखो जिंदगी भी तो केवल मेहमान है। मौत ही तो हमारी पहचान है।। कोई लाख महलों के सपने दिखाए। लेकिन घर तो सबका ही श्मशान है।

एक तरफ वो लोग जिनकी — ये महफिलों में लुटी रातें, ये झूठ में चलती सासें, ये तिनके सा आधार लिए जज्बाते, ये दिखावे में डूबे रिश्ते नाते। ये दुनियां भर की बातें। काश हम जिंदगी में ये ढूंढ लाते, काश हम ये भी पा जाते।

और दूसरी तरफ वो — जिन्हे जिंदगी से बार बार रूठना पड़ता है। जिन्हे बेवजह हर शाम टूटना पड़ता है। जिनकी खुशियां कभी जिंदा ही न हुई। जिन्हे अपनी खुशियां दूसरे की खुशियों से लूटना पड़ता है।

तो कोई यूं नहीं होता बेपरवाह। तमाम किस्से बनते हैं बेपरवाही के। कभी सूरज को सुबह से लेकर शाम में ढलते देखा है? कभी जमे बर्फ को धीरे धीरे पिघलते देखा है?

देखो जिंदगी भी तो केवल मेहमान है। मौत ही तो हमारी पहचान है।। कोई लाख महलों के सपने दिखाए। लेकिन घर तो सबका ही श्मशान है।

एक तरफ वो लोग जिनकी — ये महफिलों में लुटी रातें, ये झूठ में चलती सासें, ये तिनके सा आधार लिए जज्बाते, ये दिखावे में डूबे रिश्ते नाते। ये दुनियां भर की बातें। काश हम जिंदगी में ये ढूंढ लाते, काश हम ये भी पा जाते।

और दूसरी तरफ वो — जिन्हे जिंदगी से बार बार रूठना पड़ता है। जिन्हे बेवजह हर शाम टूटना पड़ता है। जिनकी खुशियां कभी जिंदा ही न हुई। जिन्हे अपनी खुशियां दूसरे की खुशियों से लूटना पड़ता है।

तो कोई यूं नहीं होता बेपरवाह। तमाम किस्से बनते हैं बेपरवाही के। कभी सूरज को सुबह से लेकर शाम में ढलते देखा है? कभी जमे बर्फ को धीरे धीरे पिघलते देखा है?

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जिंदगी से लेकर मौत तक

देखो जिंदगी भी तो केवल मेहमान है। मौत ही तो हमारी पहचान है।। कोई लाख महलों के सपने दिखाए। लेकिन घर तो सबका ही श्मशान है।

एक तरफ वो लोग जिनकी — ये महफिलों में लुटी रातें, ये झूठ में चलती सासे...
ये तिनके सा आधार लिए जज्बाते, ये दिखावे में डूबे रिश्ते नाते। ये दुनियां भर की बातें। काश हम जिंदगी में ये ढूंढ लाते, काश हम ये भी पा जाते।

और दूसरी तरफ वो — जिन्हे जिंदगी से बार बार रूठना पड़ता है। जिन्हे बेवजह हर शाम टूटना पड़ता है। जिनकी खुशियां कभी जिंदा ही न हुई। जिन्हे अपनी खुशियां द...
देखो जिंदगी भी तो केवल मेहमान है। मौत ही तो हमारी पहचान है।। कोई लाख महलों के सपने दिखाए। लेकिन घर तो सबका ही श्मशान है।

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