गोबर अँधेरे ही मुँह उठा और कोदई से बिदा माँगी। सबको मालूम हो गया था कि उसका ब्याह हो चुका है; इसलिए उससे कोई विवाह-सम्बन्धी चर्चा नहीं की। उसके शील-स्वभाव ने सारे घर को मुग्ध कर लिया था।
— 'कोदई की माता को उसने उपदेश दिया -- तुम बड़ी हो माता जी, पूज्य हो। पुत्र माता के रिन से लाख जन्म लेकर भी उरिन नहीं हो सकता।' बुढ़िया इस श्रद्धा पर गद्गद हो गयी।
— 'गोबर ने आगे कहा -- बहू घर से रूठकर चली गयी, तो हँसी तुम्हारी और तुम्हारे आदमी की हुई। वह अभी अबोध लड़की है। मारने से वह पढ़ेगी नहीं, उसे स्नेह से पढ़ाया जा सकता है।'
बुढ़िया ने उसे खाँड़ और सत्तू खाने को दिया। गोबर गाँव के अन्य आदमियों के साथ मजूरी की टोह में शहर चल दिया और नौ बजे अमीनाबाद के बाज़ार पहुँच गया।
बाज़ार में चार-पॉँच सौ मज़दूर जमा थे। गोबर निराश हो गया क्योंकि उसके पास कोई औज़ार भी न था। धीरे-धीरे सबको काम मिलता जा रहा था, अंत में बूढ़े और गोबर ही शेष बचे।
— 'सहसा मिरज़ा खुर्शेद ने आकर कहा -- जिसको छह आने रोज़ पर काम करना हो, वह मेरे साथ आये। सबको मजूरी पेशगी दे दी जायगी।'
मिरज़ा साहब ने काम बताया -- कबड्डी खेलना! सब चकित थे कि कबड्डी के लिए पैसे कौन देता है। गोबर ने मजूरी पेशगी माँगी और मिरज़ा ने झट पैसे दे दिए।
मिरज़ा साहब का शहर के बाहर एक अहाता था। उन्होंने सबको मजूरी बाँट दी। गोबर को उन्होंने कबड्डी के बजाय पौधे सींचने का काम सौंपा। गोबर मन मसोसकर रह गया।
युगों के बाद उन बूढ़े मज़दूरों को कबड्डी खेलने का सौभाग्य मिला। अधमरे बूढ़े भी ताल ठोक-ठोककर उछल रहे थे। बारह बजते-बजते खेल शुरू हो गया।
मिरज़ा साहब तमाशाइयों को टिकट बाँट रहे थे। टिकट दस रुपए से लेकर दो आने तक के थे। तीन बजे तक सारा अहाता भर गया। मिस मालती, मेहता, खन्ना और राय साहब भी वहाँ मौजूद थे।
— 'मिरज़ा ने मेहता को ललकारा -- आइए डाक्टर साहब, एक गोई हो जाय। मालती बोली -- फ़िलासफ़र का जोड़ फ़िलासफ़र ही से हो सकता है।'
मिरज़ा और मेहता मैदान में नंगी देह पहुँच गये। जनता बूढ़े खिलाड़ियों के कुलेलों पर तालियाँ बजा रही थी। खिलाड़ी एक-दूसरे को दबोचने और छुड़ाने में तन्मय थे।
शामियाने में खन्ना और राय साहब बैंक के सूद पर चर्चा कर रहे थे। खन्ना नौ प्रतिशत सूद माँग रहे थे जबकि राय साहब सात प्रतिशत पर अड़े थे।
राय साहब ने अपनी जैकसन रोड वाली कोठी बेचने की बात कही, जिसकी क़ीमत उन्होंने सवा लाख बतायी। खन्ना ने कहा कि मंदी के कारण अब उसकी क़ीमत कम है।
मिस्टर तंखा मिस मालती को चुनाव में खड़ा होने के लिए मना रहे थे। मालती ने कहा कि उनके पास चुनाव पर खर्च करने के लिए धन नहीं है और न ही वे हार की ज़िल्लत उठाना चाहती हैं।
मैदान में मेहता की टीम कमज़ोर पड़ती जा रही थी। मिरज़ा पक्के खिलाड़ी थे। मालती ने चिन्ता जताई कि मेहता की पार्टी बुरी तरह पिट रही है।
— 'खन्ना ने मालती को चिढ़ाया -- मज़ा आयेगा तब, जब मिरज़ा मेहता को दबोचकर रगड़ेंगे और मेहता साहब चीं बोलेंगे। मालती जलकर बोली -- आपकी हिम्मत न पड़ी बाहर निकलने की।'
अंत में केवल मेहता अकेले बच गये। शत्रुओं ने उन्हें घेर लिया। वातावरण गर्म हो गया। मिरज़ा ने एक छलाँग मारी और मेहता की कमर पकड़ ली। दोनों में मल्लयुद्ध होने लगा।
मेहता ज़मीन पर चित पड़े थे और मिरज़ा उनकी गर्दन दबाए बैठे थे। मालती ने विरोध किया कि यह खेल नहीं अदावत है।
— 'मिरज़ा बोले -- जब तक यह चीं न बोलेंगे, मैं नहीं छोड़ूँगा। मालती ने कहा -- आप इतनी ज़बरदस्ती नहीं कर सकते।'
अचानक मेहता ने ज़ोर लगाया और मिरज़ा को पटककर अपनी पाली की ओर भागे। हज़ारों लोग पागलों की तरह टोपियाँ उछालने लगे। डाक्टर साहब ने हारी हुई बाज़ी जीत ली।
— 'चाय-पानी के समय मेहता बोले -- महिला की सहानुभूति हार को जीत बना सकती है। मिरज़ा ने मालती की ओर देखा और कहा -- जभी तो मुझे हैरत थी कि आप ऊपर कैसे आ गये।'
मेहता और मिरज़ा नहाने लगे। मिरज़ा ने मेहता से उनकी शादी और मालती के बारे में पूछा। मेहता ने कहा कि मालती में वह बात नहीं है जो वे जीवन-संगिनी में चाहते हैं।
— 'मेहता बोले -- मेरे ज़ेहन में औरत वफ़ा और त्याग की मूर्ति है। नारी में पुरुष के गुण आ जाते हैं तो वह कुलटा हो जाती है। पुरुष आकर्षित होता है स्त्री की ओर जो सवांश में स्त्री हो।'
— 'मेहता ने मिसेज़ खन्ना का उदाहरण दिया और कहा -- खन्ना अभागे हैं जो हीरा पाकर काँच का टुकड़ा समझ रहे हैं। मैं ऐसी बीबी चाहता हूँ जो मेरे जीवन को प्रेम और त्याग से उज्ज्वल बना दे।'
— 'मिरज़ा ने कहा -- मिस मालती आपको छोड़ने वाली नहीं। मेहता बोले -- ऐसी औरतों से मैं केवल मनोरंजन कर सकता हूँ, ब्याह नहीं। ब्याह तो आत्म-समर्पण है।'
मेहता विदा हो गये। मिरज़ा ने गोबर को देखा जो अभी तक काम कर रहा था। मिरज़ा ने उसे पन्द्रह रुपए महीने पर नौकरी पर रख लिया और झोपड़ी में रहने की जगह भी दे दी।
गोबर को जैसे स्वर्ग मिल गया।